अधूरी कॉपियों में ठहरा हुआ आकाश
(युद्ध की विभीषिका पर आधारित कविता ) सृजन संसार में आज एक ऐसा दृश्य प्रस्तुत है जो सृजन नहीं, विनाश की कहानी कहता है… लेकिन हर विनाश के भीतरएक अधूरा आकाश अब भी जीवित है। सुबह अभी पूरी तरह उजली भी नहीं हुई थीकि स्कूल की घंटी नेएक सामान्य दिन का सपना देखा। बस्तों में […]
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